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इस्लाम या इसाई धर्म अपनाए दलितों, को आरक्षण क्यों नहीं !!!

दलित विरोधी बीजेपी एक बार फिर बेनक़ाब। हर सरकार दलितों, मज़लूमो, पिछङो की उत्थान(फलाह) और समाज में मसावी नेज़ाम की तो बङी बङी बातें करती लेकिन हक़ीक़त यह है कि आज़ादी के 73 साल वर्ष बाद भी आबादी के एक बङे तबके को इनके वाजिब हक़ से महरूम रखा गया ।अब एक बार फिर धर्म के नाम पर इनको इनके वाजिब हक़ से महरूम रखने के लिए कानूनी तरीका अपनाया जा रहा है। राज्यसभा में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जो बयान दिया है उस बीजेपी का अल्पसंख्यक और दलित विरोधी चेहरा सामने आया है। श्री प्रसाद को ये नहीं मालूम मज़लूम,महकूम,महरूम कोई भी हो किसी ज़ात किसी मसलक या किसी भी मज़हब का मानने वाला हो उसके दर्द और हालात एक होते हैं इसिलिए तो यह कहा गया है( दलित पिछड़ एक समान क्या हिन्दु क्या मुसलमान)माननीय मंत्री जी कुछ नया नहीं कह रहे या कर रहे हैं ,आरएसएस और बीजेपी की दलित, मुसलमान और ईसाई विरोधी एजेंडा तो शुरू से ही रही है। अब तो सिर्फ उसको अम्ली जामा पहनाया जा रहा है। शायद इन नासमझों को कौन बताये कि किसी के मज़हब बदलने से उसकी माली, सियासी,समाजी और तालीमी हालात नहीं बदलती। बाबा साहेब ने इन तबको को आरक्षण सिर्फ इनकी ज़ात या मज़हबी बुनियाद पर नहीं दिया था बल्कि उनहोंने इनकी माली,समाजी,तालीमी और सियासी पासमांदगी के बुनियाद पर दिया है। बीजेपी ऐसा करके ना सिर्फ इनको इनके वाजिब हक़ से महरूम कर रही बल्कि दो धर्मों के बीच खाई भी पैदा कर रही है ।अब समय आ गया है कि जितना भी मज़लूम,महकूम तबका है सब एक बार जात, मज़हब,मसलक को दरकिनार कर के ज़ालिम,जाबिर,गासिब जो भी हुकूमत हू इनका सङक से लेकर संसद तक मुकाबला करे।

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