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 आंसू रोते मोदी जी,किसान पर कोई आंसु नहीं

रोते हमारे मोदी जी,,,राज्यसभा में मोदी जी को रोते देख मगरमच्छ भी हुआ उनका मुरीद। राज्यसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद को विदाई देते समय मोदी जी को नैचुरल तरीके से रोता देख मगरमच्छ भी बेचारा शर्मा गया। बात कुछ यों हुई कि श्री आज़ाद को विदाई देते मोदी जी सन् 2006 में मारे गए गुजरात के लोगों का ज़िक्र करते हुए बताया कि श्री आज़ाद तब जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री हुआ करते थे,तब बङी संख्या गुजरात से कश्मीर घूमने आये पर्यटकों को आतंकवादियों ने अपना निशाना बनाया था।तब श्री आज़ाद ने प्राधानमंत्री मोदी जी को काफी भावुक हो कर इस घटना की जानकारी दी, और मोदी जी की आग्रह पर हवाई मार्ग से इनकी लाशों को भेजा और मृतकों के परिजनों से मिल कर चीख मारकर रोने लगे इस घटना याद दिलाते हुए बेचारे प्रधानमंत्री भी रोने लगे,मोदी जी को रोता देखा सांसद लोग बेचारे मन ही मन हंसने लगे,15 साल पहले की घटना को याद कर के उनको रोना रहा है ।लेकिन मोदी जी के मुख्यमंत्री रहते हुए 2002 में गुजरात दंगे मारे गये 3000 से भी ज्यादा मुसलमानों की नस्लकुशी इनको याद नहीं, तीन महीने से भी ज्यादा से हमारे अन्नदाता आन्दोलन करते हुए 200 से भी ज्यादा किसानों की मौत हो गई उन बेचारों के लिए मोदी जी के आंखों में एक बूंद आंसू नहीं है। मोदी जी के एहसासे दर्द का जवाब नहीं ये तो वही बात हो गई कि ،एक आंख में काजल दूसरे आंख में सूरमा,,

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