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जोशीमठ में तबाही फिर भी सरकार की वाहवाही,

जोशीमठ में तबाही फिर भी सरकार की वाहवाही,,,प्राकृति में निरंतर मानवीय दख़ल से इंसान अपनी जिंदगी में खुद ही ज़हर घोल रहा है। सरकारें आती जाती रहती हैं एक दूसरे पर आरोप लगाती रहती है,लेकिन दुनिया की जो समस्या है वह दिन प्रतिदिन विकराल सथित धारण करता ही जा रही है। आज दुनिया अनैतिक तरीके से ज़िंदगी के हर कारोबार को अंजाम दे रही है उसमें प्राकृति को हम मुकम्मल तौर पर नज़र अंदाज करते जा रहे हैं। आज इंसान जिंदगी जीने के लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी चीज़ हवा को बर्बाद करके अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति कर रहा है। इंसान की इस खुदग़रज़ी के लिए खुद उसके ही खुद के बच्चों या आने वाली नस्लों को चूकानी होगी। कोरोना महामारी के ज़रीये ऊपरवाले ने पूरी दुनिया को ये गुप्त संदेश दी है कि इंसान सब कामों को छोड़ कर प्राकृति पर ध्यान दे, नहीं तो अगली बार उसे उस गुनाह के लिए सज़ा मिलेगी, जिसे वह गुनाह समझता ही नहीं ।जोशीमठ की घटना तो एक बानगी है। ये बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ तो मानो पूरे दुनिया को बर्बाद करके ही दम लेगी। सरकार और इन कम्पनियों का जो गठजोड़ है उसने सथित को बद से बदतर कर दी है। प्राकृति संसाधन का दोहन तो समझ में आता है परन्तु इसका शोषण समझ में नहीं आता है। समय रहते जाग जाने की ज़रूरत है नहीं तो शायद आने वाली नस्लें हमारे पापों का प्रायश्चित करने के लिए भी ना रहे।

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