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मुख्यमंत्री केसीआर ने कहा कि तेलंगाना राज्य के सिंचाई के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलावों का पुनर्गठन करने निर्णय लिया गया हैं।

मुख्यमंत्री केसीआर ने कहा कि तेलंगाना राज्य के सिंचाई के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलावों का पुनर्गठन करने निर्णय लिया गया हैं। उन्होंने स्पष्टता देते हुए कहा कि तेलंगाना राज्य के गठन से पहले और बाद में, स्थिति बहुत बदल गई है और सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि हुई है। सीएम ने कहा कि परियोजनाओं, नहरों, जलाशयों, पंप घर और घाटी के बढ़ने के कारण कार्यभार भी बढ़ा है। बदली हुई स्थिति के अनुरूप, जल संसाधन विभाग में सीईओं को जिम्मेदारी सौंपते हुए “अधिक प्रादेशिक क्षेत्रों” का बनावट किया जाने की घोषणा किया है।अतीत के विपरीत, विभिन्न विभागों को मिलाकर जल संसाधन विभाग के रूप में कार्य करेगा।
सीएम केसीआर ने मंगलवार को प्रगति भवन में जल संसाधन विभाग के पुनर्गठन पर समीक्षा की। इस बैठक में क्षेत्रीय स्तर पर चीफ इंजीनियरों (मुख्य अभियंताओं) के संख्या को वर्तमान स्तर पर 13 से 19 तक बढ़ाने के लिए निर्णय लिया गया। शुरू में आदिलाबाद, मनचिरयाल , जगित्याल, करीमनगर, निज़ामाबाद, कामारेड्डी, रामागुंडम, वारंगल, मुलुगु, खम्मम, कोथागुडेम, गजवेल, संगारेड्डी, नलगोंडा, सूर्यपेटा, महबूबनगर, वनपर्ती, नागरकरनूल, हैदराबाद केंद्रों में चीफ इंजीनियर (मुख्य अभियंता) प्रादेशिक क्षेत्रों का बनावट के लिए निर्णय लिया गया। इन प्रादेशिक क्षेत्रों के अंदर रही परियोजनाएँ, तालाब, आईडीसी लिफ्ट, जलाशय, बैराज, पंप घर , नहरें और सबस्टेशन के सभी मामले उनके चीफ इंजीनियर संभालेंगे। सिंचाई विभाग, जो पहले बड़े, मध्यम, लघु स्तर, आईडीसी जैसी विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत था, अब केवल जल संसाधन विभाग के रूप में ही रहेगा।
सीएम केसीआर ने मेदक जिले के घनपुर बाँध का नाम वनदुर्गा परियोजना के रूप में तय किया। सीएम केसीआर अधिकारियों को पाखाला परियोजना के सम्बंधित नहरों के मरम्मत करने के लिए निर्देश दिया। नरसम्पेट के विधायक पेद्दी सुदर्शन रेड्डी ने मुख्यमंत्री से अनुरोध की है कि काकतीय वंशीय काल के दौरान बनाई गई नहरों की स्तिथि बिगड़ गयी हैं और उन्हें पुनर्स्थापित करके 30,000 एकड़ सामरिक कृषि भूमि को स्थिर किया जा सकता है। इसके जवाब में, मुख्यमंत्री ने कहा कि काकतीय द्वारा निर्मित नहरों को बहाल करने का अर्थ धरोहरों का संरक्षण करना है। अधिकारियों को तुरंत आकलन करने का आदेश दिया गया।
जल संसाधन विभाग के सम्बंधित इस बैठक में बैठक में मंत्री निरंजन रेड्डी, ईटेला राजेंदर, रायतुबंधु समिति के राज्यअध्यक्ष,विधान परिषद सदस्य पल्ला राजेश्वर रेड्डी, विधायक पेद्दि सुदर्शन रेड्डी, विधान परिषद सदस्य शेरी सुभाष रेड्डी, सिंचाई विभाग के मुख्य सचिव रजत कुमार, सीएमओ के सचिव स्मिता सभरवाल, सीएम के ओएसडी श्रीधर देशपांडे, सी.बी नगेंदर राव, डिप्टी ईएनसी अनीता , डीडीए चंदर राव, एसई आर. कोटेश्वर राव, ईई प्रसाद, एस. विजय कुमार, डीईई वेंकट नारायणा, एईई शिवा कुमार, केपीएमए रत्नम शामिल हैं।

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